Friday, July 23, 2010

खुदा की वंदना

है दुआ आज मेरी,
उस खुदा परमेश्वर से,
इल्म और बुद्धि अता कर
अपनी कृपालु नज़र से ।
है शरीर आत्मा और का,
भास्कर और सोम भी तू ,
नाम है अल्लाह गरचे ,
है कही पर ओम भी तू ।
ऋषियों को है दिया गर ज्ञान का भंडार तूने,
आदमी को भी दिया इल्म का उपहार तूने ।
हर मनुष्य का इस जहाँ मे है तन्हा महेश तू ही ,
गणपति और ब्रह्मा का है श्री गणेश तू ही ।
क्या अजब माया है तेरी क्या अजब धंधे है तेरे ,
राम और किरषण सरीखे हुक्म के बन्दे है तेरे
है गलत ये कि मिला हो, कुछ तेरा अंश किसी में ,
हाँ मुहम्मद को बनाया एक नराशंस सभी मे
तूने इन सब को बनाया , तूने ही दुनिया रची है ,
ये सभी पूजक हैं तेरे याद उनकी यूं बची है
अक़ल दे हम किसी को, न बराबर तेरा ठहराएँ,
चैन दुनिया में मिले और मर के फिर जन्नत में जाएँ

2 comments:

  1. .

    आदरणीय भाई- डॉ जमील एहमद ,

    आपकी कविता पढ़ी , हर्ष से मन पुलकित हो गया। इस संसार को चलाने वाली एक ही शक्ति है , हम सभी उसी सर्व शक्तिमान के बनाये हुए बन्दे हैं। श्रद्धा के अनुरूप , इश्वर के नाम और रूप अनेक हो सकते हैं लेकिन प्रयेक जीव में उसी इश्वर का वास है जिसे हम मंदिर, मस्जिद और गिरिजाघरों में पूजते हैं।

    आपकी इस सुन्दर कविता को अपनी पोस्ट पर लगा रही हूँ, जिससे लोगों में प्रेम का सन्देश पहुंचे।

    .

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  2. पांच लाख से भी जियादा लोग फायदा उठा चुके हैं
    प्यारे मालिक के ये दो नाम हैं जो कोई भी इनको सच्चे दिल से 100 बार पढेगा।
    मालिक उसको हर परेशानी से छुटकारा देगा और अपना सच्चा रास्ता
    दिखा कर रहेगा। वो दो नाम यह हैं।
    या हादी
    (ऐ सच्चा रास्ता दिखाने वाले)

    या रहीम
    (ऐ हर परेशानी में दया करने वाले)

    आइये हमारे ब्लॉग पर और पढ़िए एक छोटी सी पुस्तक
    {आप की अमानत आपकी सेवा में}
    इस पुस्तक को पढ़ कर
    पांच लाख से भी जियादा लोग
    फायदा उठा चुके हैं ब्लॉग का पता है aapkiamanat.blogspotcom

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