Friday, July 23, 2010

खुदा की वंदना

है दुआ आज मेरी,
उस खुदा परमेश्वर से,
इल्म और बुद्धि अता कर
अपनी कृपालु नज़र से ।
है शरीर आत्मा और का,
भास्कर और सोम भी तू ,
नाम है अल्लाह गरचे ,
है कही पर ओम भी तू ।
ऋषियों को है दिया गर ज्ञान का भंडार तूने,
आदमी को भी दिया इल्म का उपहार तूने ।
हर मनुष्य का इस जहाँ मे है तन्हा महेश तू ही ,
गणपति और ब्रह्मा का है श्री गणेश तू ही ।
क्या अजब माया है तेरी क्या अजब धंधे है तेरे ,
राम और किरषण सरीखे हुक्म के बन्दे है तेरे
है गलत ये कि मिला हो, कुछ तेरा अंश किसी में ,
हाँ मुहम्मद को बनाया एक नराशंस सभी मे
तूने इन सब को बनाया , तूने ही दुनिया रची है ,
ये सभी पूजक हैं तेरे याद उनकी यूं बची है
अक़ल दे हम किसी को, न बराबर तेरा ठहराएँ,
चैन दुनिया में मिले और मर के फिर जन्नत में जाएँ